शनिवार, 8 अगस्त 2020

आखिर ये किसी की बेटी है

 

आखिर ये किसी की बेटी है

 

कैद हो गया घर में बचपन, ममता सिसक कर रोती है।

बुरी नजर ना डालो इस पर, आखिर ये किसी की बेटी है।।

 

खो -खो, लंगड़ी और कबड्डी, गुड्डा - गुड़िया खेल ये सारे,

दूर हो गया अब इनसे बचपन, सूने हो गए सब गली चौबारे।

 

खिड़की से झांके वो बिटिया, बाहर जाए तो माँ डरती है।

बुरी नजर ना डालो इस पर, आखिर ये किसी की बेटी है।।

 

सावन के अब भी है झूले, मेले आज भी सजते है

लेकिन बाहर भेजने में अब, मम्मी - पापा डरते है।

 

अपने माँ - बाप की गुड़िया हूँ मैं, ये दुनिया कहाँ समझती है।

बुरी नजर ना डालो इस पर,  आखिर ये किसी की बेटी है।।

 

ये हैवान क्या समझेंगे कि, माँ - बाप पर क्या गुजरती है

जब उनकी नाजुक, फूल सी लाडो,खून में सनी, दर्द से तड़पती है।

 

जितना तड़पे वो सोनचिरैया, उतनी मौत माँ मरती है।

बुरी नजर ना डालो इस पर, आखिर ये किसी कि बेटी है।।

 

धन्यवाद

सोनिया तिवारी

मंगलवार, 4 अगस्त 2020

अमर रहेगा हिन्दोस्तान

"अमर रहेगा हिन्दोस्तान"

 

थर - थर कांपे धरती, अम्बर, दुश्मन का दिल डोला है,

भारत माँ के वीर चले जब, पहन के खाकी चोला है।।

 

अब क्या रुकना राहों में जब, हाथो में तिरंगा थाम लिया।

वीरों ने जब अपना छप्पन इंच का सीना नाप लिया।।

 

जो बढ़ चले है अब कदम, ये कदम नहीं रुकने देंगे।

अब किसी के आगे हम अपने देश को ना झुकने देंगे।।

 

भारत माँ का नाम रहेगा, जब तक चाँद सितारा है।

गूँजेगा कण - कण में नारा, हिन्दोस्तान हमारा है।।

 

भारत माँ के चरणों में हम अपना शीश चढ़ायेंगे।

अमन, चैन की नयी चुनरिया भारत माँ को ओढ़ाएंगे।।

 

सुन लो चीन और पाकिस्तान जो अब ना होश में आओगे।

टकराके फिर भारत से तुम मिट्टी में मिल जाओगे।।

 

हम अमन पसंद लोग है हम खुद से ना टकराते है।

पर आँख फोड़ के हाथ में दे दे जो हमको आँख दिखाते है।।

 

अमर हमारा देश रहेगा, अमर हमारी माँ भारती है।

यहाँ जंग पे जाये सिपाही तो खुद दुल्हन तिलक करती है।।

 

यहाँ बेटा शहीद हो जाये तो माँ सीना चौड़ा करती है।

एक लाल कुर्बान हुआ तो दूसरे को जंग पे भेजती है।।

 

चारो दिशाओ में भारत माँ का गौरव शाली नाम रहे।

हम रहे ना रहे जहा में, अमर हमारा हिन्दोस्तान रहे।।

 

धन्यवाद

सोनिया तिवारी


सोमवार, 3 अगस्त 2020

पावस

"पावस"

 

 

फिर आया पावस मनभावन, संवर गया वसुधा का यौवन।

सरस, शीतल बयार चली, झूम रहा है जनजीवन।।

 

काली, घनघोर घटाएं छायी, धरती ने फिर ली अंगड़ाई।

धानी रंग की ओढ़ चुनरिया, बहनो ने कजरी फिर गायी।।

 

महक उठे फिर बाग़ - बगीचे, चमक उठा हर घर आँगन।

पंख फैलाकर, झूम - झूम कर मोर करे सबका अभिवादन।।

 

नयी - नयी सी लागे वसुधा, चहुँ दिशी छायी हरियाली।

हाथो में रचाके मेहँदी शर्माए दुल्हन मतवाली।।

 

झूम - झूम कर पावस बरसे, बह जाए जन - जीवन के दुःख।

नए रंग हो, नयी उमंग हो, नयी दिशा में हर जीव हो उन्मुख।।

 

लहंगा पहन के ठुमके बिटिया, बांधे भाई को राखी के धागे।

सर पर रखकर हाथ बहन के, भाई करे बहन से वादे।।

 

चहुँ ओर खुशियां लाता पावस, सबके मन को भाता पावस।

बुँदे प्यार, मोहब्बत के, घर - घर पर बरसाता पावस।।

 

धन्यवाद

सोनिया तिवारी


शनिवार, 1 अगस्त 2020

बहना कहती है

"बहना कहती है"

 

 

फिर से आया है रक्षाबंधन, पर खो गया है अपनापन।

बदल गयी है भावनाये, बदल रहा है अब जीवन।।

 

माँ - बाप नहीं तो मायके में अब प्यार नहीं मिलता,

भैया - भाभी के दरवाजे अब सत्कार नहीं मिलता।

 

तन जाती है भाई की भौहे जब दरवाजे बहना आती है,

देख रवैया अपनों का अब आँखे भर - भर आती है।

 

ये मेरा भी घर था, ये मेरी बचपन मेरी आदत है,

पर अब ये लगता है जैसे ये भैया की विरासत है।

 

दो दिन भी ठहरने का अब तो अधिकार नहीं मिलता।

भैया - भाभी के दरवाजे अब प्यार नहीं मिलता।।

 

क्यों ये लगता है भाई को कि बहना कुछ मांगने आयी है,

बहन तो भाई को बचपन की याद दिलाने आयी है।

 

याद दिलाना है उसको कभी गोदी में खिलाया था,

बड़ी बहन होने का मैंने फर्ज निभाया था।

 

कैसे उसको समझाऊ वो याद अभी तक आता है,

मुझे मायके में उसका ये मोह खींच ले जाता है।

 

भाई - बहन के रिश्ते में ब्यापार नहीं मिलता

भाई - भाभी के दरवाजे अब सत्कार नहीं मिलता।।

 

राखी बांधने से भी अब बहना का मन सकुचाता है,

भाई अब इस बंधन को लालच का बंधन बताता है।

 

कैसे उसको समझाऊ कि उसकी ये सोच तो झूठी है,

बहना तो भाई के बस दो प्यार के बोल कि भूखी है।

 

सहके ये अपमान भी बहना तो लौट ही जाएगी,

राखी नहीं बांधेगी फिर भी दुआ का दीप जलायेगी।

 

क्यों जाए उसके दरवाजे अब आभार नहीं मिलता।

भाई - भाभी के दरवाजे अब प्यार नहीं मिलता।।

 

याद मायके कि कर के मै दिन - रात रोती हूँ,

रहो सलामत भैया मै हर रोज दुवाएँ देती हूँ,

 

एक दिन तुम्हारी बेटी से जब यही सलूक दुहराया जायेगा,

उस दिन मेरा भैया मेरा भी दर्द समझ ही जायेगा।

 

बेटी के चेहरे में तब वो बहना को भी देखेगा,

कितना मुझको दर्द हुआ इस बात को फिर वो समझेगा।

 

दुनिया के हर भाई को ये बात समझना ही होगा,

आज जो बहना रोती है कल बेटी को रोना होगा।

 

जो तुमने बहना के साथ किया वो तुम तक लौट के आएगा

जब बोया पेड़ बबूल का तो आम कहा से खायेगा।

 

तुम दोगे इज्जत बहनो को तुम्हारा बेटा भी ये देखेगा

वो भी बहन को इज्जत देना तुमसे ही तो सीखेगा।

 

एक बार चला जो जाए वो संसार नहीं मिलता।

भाई - भाभी के दरवाजे अब सत्कार नहीं मिलता।

माँ - बाप के बिना मायके में अब प्यार नहीं मिलता।।

 

धन्यवाद

सोनिया तिवारी


शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

कोरोना और मानवता

"कोरोना और मानवता"

 

बरसा रहा है कहर दुनिया पर

दुर्भाग्य कोरोना लाया है

अपनों ने ही अपनों को

दरवाजे पर से हटाया है।

 

तड़प रहा है दर्द से कोई

हम अपनी जान छुड़ाते है

क्या पता कोरोना ही हो

हम यही सोच सकुचाते है।

 

जागरूकता अच्छी है पर

संवेदनहीन नहीं होना,

थोड़े से डर की खातिर तुम

अपनी इंसानियत को मत खोना।

 

अपनी भी तुम जान बचाओ

दुसरो की भी ढाल बनो,

कुछ और नहीं ज्यादा करना

बस एक अच्छे इंसान बनो।

 

देख हमारा बुलंद हौसला

ये ढीठ कोरोना हारेगा

सूखे पतझड़ से जीवन में

मधुबन पाँव पसारेगा।

 

दृढ़ कर लो अपनी इच्छाशक्ति

बिलकुल निराश नहीं होना

दिन में कई बार अपने

हाथो को साबुन से धोना।

 

गमछा, मास्क लगाओगे तो

सांस नहीं फूल जाएगी,

जब साथ होगा हिन्दोस्तान तो

ये महामारी भाग जाएगी।

 

खिल जाएगी फिर से कलियाँ

जन - जन के घर आँगन में

मुस्कुराएगी फिर मानवता

हर किसी इंसान के मन मे।

 

सरकार का साथ निभाओ

करके पालन सारे नियमो का

थोड़े समय की पाबन्दी है

फिर लेना मजा घूमने का।

 

मरने न दो मानवता को

अपना धर्म निभाओ तुम,

करो बचाव कोरोना से खुद का

और सबको सजग बनाओ तुम।।

 

भारत माता के वीरो को खुद

माँ भारती ने पुकारा है।

चलो बता दे कोरोना को कि

ये हिन्दोस्तान हमारा है।

ये हिन्दोस्तान हमारा है।।

 

धन्यवाद

सोनिया तिवारी


रविवार, 26 जुलाई 2020

मै नारी हूँ

नमस्ते दोस्तों,

मेरी आज की ये रचना नारी के मजबूत व्यक्तित्व को समर्पित है। नारी एक तरफ तो ममता का सागर है और दूसरी तरफ उसका मजबूत हौसला पत्थर से भी टकरा जाने की क्षमता रखता है।

 

“मै नारी हूँ”

 

दुनिया ने सारे रीति - रिवाज

बस मेरे लिए बनाये हैं,

मैंने तो मांगी खुशियां थी पर

गम ही मेरे हिस्से आये है।

 

चंद बचे - खुचे जो सपने थे

वो भी गैरो पर वारी हूँ।

और बड़े गर्व से कहती हूँ

मै नारी हूँ, मै नारी हूँ।।

 

अबला का मुझको नाम दिया

पर सबल नहीं मुझ सा कोई

मै पत्थर से भी टकरा जाऊं

है प्रबल नहीं मुझ सा कोई।

 

मै जनम जीवन को देती हूँ

करती नौ महीने रखवाली हूँ।

और बड़े गर्व से कहती हूँ

मै नारी हूँ, मै नारी हूँ।।

 

तानों ने झुठलाए हरदम

मेरी भावना मेरे अर्थ

कठोर मर्द समाज मे मेरी

ममता हुई है व्यर्थ

 

जग भूल गया की ढाई अक्षर

प्यार की बस मै प्यासी हूँ,

मै बड़े गर्व से कहती हूँ

मैं नारी हूँ, मै नारी हूँ।।

 

मै बोझ नहीं हूँ धरती पर

ये बात सबको बतला दूंगी,

मर्दो को टक्कर दूंगी मैं

और अपनी जगह बना लुंगी।

 

मै कोमल हूँ कमजोर नहीं

मै मर्द समाज पर भारी हूँ

और बड़े गर्व से कहती हूँ

मै नारी हूँ, मै नारी हूँ।।

 

नहीं चाहिए कोई सहानुभूति

मै बराबरी का हक़ मांगू,

जो मेरे लिए बनाया है

मैं उसको तो बेशक मांगू।

 

कितना भी आधुनिक बन जाऊ

मै निभाती जिम्मेदारी हूँ,

और बड़े गर्व से कहती हूँ

मै नारी हूँ, मैं नारी हूँ।।

 

आँचल में ममता लेकर भी

तलवार पकड़ मै सकती हूँ,

जब आंच मेरी ममता पर आये

मै झाँसी की रानी बन सकती हूँ।

 

करने को असुरों का मर्दन

मै दुर्गा रूप भी धारी हूँ,

और बड़े गर्व से कहती हूँ

मै नारी हूँ, मै नारी हूँ।।

 

त्याग, समर्पण की देवी

पग - पग पर मुझको कहते है,

जब मेरे जिस्म को नोचेंगे,

तब देवी नहीं समझते हैं।

 

नहीं नाम मुझे देवी का दो

मै इज्जत की अधिकारी हूँ,

मै गौरव, प्यार की मूरत हूँ

मै नारी हूँ, मै नारी हूँ।।

 

धन्यवाद

सोनिया तिवारी


झूठी हंसी

नमस्ते दोस्तों,

कई बार हम दुनिया को दिखाने के लिए झूठी हंसी का सहारा लेते है। हम इसलिए हँसते है ताकि कोई हमारे अंदर की उदासी को ना ढूढ़ पाए। हम बाहर से तो खामोश होते है, पर हमारे अंदर दर्द का तूफ़ान उमड़ रहा होता है। कुछ इसी तरह की कश्मकश को बयान करती हुई मेरी ये रचना आप सबको जरूर पसंद आएगी...........

 

“झूठी हंसी”

 

आँखों से तो आंसू बहते है

पर होंठो पे हंसी रखती हूँ

दुनिया को दिखाने की खातिर

चेहरे पे खुशी रखती हूँ।

 

अब घुट रही हर सांस मेरी

मेरी नजरे भी शर्मिंदा है,

मेरा दिल है मौत के पहलू में

पर जिस्म अभी तक जिन्दा है।

 

जहाँ कोई शोर नहीं होता

मै वो वीरानी बस्ती हूँ।

दुनिया को दिखाने की खातिर

चेहरे पे खुशी रखती हूँ।।

 

तेरे शब्दों ने ही कुचल दिए

अब स्पंदन के अर्थ,

तेरे कर्कश वाक - विलास से

मेरे गीत हुए है व्यर्थ।

 

तेरे कड़वे बोल और तानों से

आँखों में नमी रखती हूँ।

दुनिया को दिखाने की खातिर

चेहरे पे खुशी रखती हूँ।।

 

बस एक ही भूल हुई मुझसे

वो है ढाई अक्षर प्यार,

बस इसी भूल ने लूट लिया

मेरा ख्वाब, मेरा संसार।

 

तुम मुझसे घृणा ही करते रहे

मै प्यार लुटाये बैठी हूँ।

दुनिया को दिखाने की खातिर

चेहरे पे खुशी रखती हूँ।।

 

धन्यवाद

सोनिया तिवारी


आखिर ये किसी की बेटी है

  आखिर ये किसी की बेटी है   कैद हो गया घर में बचपन, ममता सिसक कर रोती है। बुरी नजर ना डालो इस पर, आखिर ये किसी की बेटी है।।   खो -...